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Showing posts from August, 2021

Why did Mahatma Gandhi not give full emphasis?

महात्मा गांधी जी ( पूर्ण जोर ना देना) दोनों के बीच कई चीजे एक समान थी जिनमें देश के सामान्य हितों को अहमियत देना भी शामिल था आजादी कों लेकर उनका विचार सिर्फ राजनीतिक नहीं था दोनों चाहते थे की देश की जनता शोषण की बेरियों से मुक्त हो और इसी दिशा में उनके प्रयास रहे दोनों में एक चीज विरोधाभाषी थी लेकिन इसके बावजूद दोनों में कुछ समम्नताए भी थी भगत सिंह नास्तिक थे और गांधी जी परम आस्तिक लेकिन धर्म के नाम पर फैलाई जाने वाली नफरत के दोनों ही खिलाफ थे। देश्वसियों को पूरा विश्वास था की भगत सिंह को कोई बच्चा सकता है तो वो सिर्फ गांधी जी है इसलीय देश की जनता गांधी जी पर पूरा भरोसा करती है की वो कुछ भी करके तीनों वीरों को बचा लेंगे। गांधी जी ने यहा तक बोल दिया था की मैं भगत सिंह को बचाने के लिय अपना जीवन भी कुर्बान कर सकता हु। लेकिन महात्मा गांधी जी ने अपना पूर्ण जोर इसलीय नहीं लगाया क्योंकि वह खुल कर भगत सिंह के हिंसात्मक क्रांतिकारी योगदान का समर्थन नहीं करना चाहते थे क्योंकि उन्हे मालूम था की भगत सिंह खुद को बचना नहीं चाहते थे उनकी जिद्द थी की वो फासी पर चढ़ेंगे। शुभस चंद्र बौस ने तो बोल दिया ...

What were the serious reasons for hanging the day before?

फासी एक दिन पहले देने के गंभीर कारण क्या थे ? कहा जाता है की भारत वर्ष में   6 लाख 32 हजार क्रांतिवीर   थे जिन्होंने अपनी कुर्बानी दि थी। भगत सिंह उनके सर्वोच्च शिखर पर है ऐसा पूरा देश मानता है।   शाहिद - ए - आजम   का खताब भगत सिंह को मिला ऐसा पूरे देश की तरफ से उनके लिय भवना थी। अंग्रेजों की सरकार ने भगत सिंह को फासी देने का फैसला   24 मार्च 1931   को तय किया था लेकिन भगत सिंह को फासी देने का फैसला एक दिन पहले क्यों ले लिया गया। यह एक विचार करने वाला गंभीर विषय है। की एस क्यों किया गया बिना किसी को बताए। क्योंकि अंग्रेजों ने अपने ही कानून का उल्लाघन किया भगत सिंह को फासी देने में। क्योंकि फासी तो सुबह के समय ही दिया जाता है एस कानून तो अंग्रेजों ने स्वम ही बनाया था। जो की दुनिया के सभी देशों में यही कानून है। “ लेकिन 24 मार्च की सुबह 6 बजे फासी न देकर 23 मार्च की शाम 7:30 बजे ही क्यों फासी दि गई। ” इसके पीछे का कारण हमें अवश्य ही जानना चाहिए। अंग्रेजों के संसद लंदन के   हाउस ऑफ कॉमेंस   से मिले दस्तावेज की आधार पर हमें पता चलता है की भगत सिंह को ...

Some interesting facts about Bhagat Singh

भागत सिंह के बारे में कुछ गजब के रोचक तथ्य:-     भगत सिंह को हिन्दी, उर्दू, पंजाबी तथा अंग्रेजी के अलावा बांग्ला भी आती थी जो उनहोने बटूकेसवर दत से सीखी थी।   भगत सिंह को प्यार से घर में सब भगू कहकर बुलाते थे। 21 जून 1929 के दिन को भगत सिंह के नाम पर मनाया गया था, अंग्रेजों को यह दर्शाने के लिय की भारतीय जनता भगत सिंह के समर्थन में कुछ भी कर सकती है। फासी के समय भगत सिंह और सुखदेव की उम्र सिर्फ 23 साल थी लेकिन राजगुरु की उम्र 22 साल थी। भगत सिंह के कानूनी सलाहकार दूनी चंद थे तथा ब्रिटिश हुकूमत की तरफ से वकील कार्डन नोंड थे। भगत सिंह पहले आदमी थे जिन्होंने कोंग्रेस पार्टी के डोमिनीयन स्टेटस की जगह पूर्ण स्वराज की मांग की थी। भगत सिंह शादी नहीं करना चाहते थे, जब उनके माता - पिता उनकी शादी की योजना बना रहे थे तब वह घर छोर कर कानपुर आ गए थे और तब उन्होंने कहा था “अब तो आजादी ही मेंरी दुल्हन बनेगी” कॉलेज के दिनों में भगत सिंह एक अच्छे अभिनेता भी थे उन्होंने बहुत से नाटकों में  भी हिस लिया था और भगत सिंह को कुस्ती का भी शौक था । भगत सिंह एक अच्छे वक्ता और लेखक ...