महात्मा गांधी जी ( पूर्ण जोर ना देना) दोनों के बीच कई चीजे एक समान थी जिनमें देश के सामान्य हितों को अहमियत देना भी शामिल था आजादी कों लेकर उनका विचार सिर्फ राजनीतिक नहीं था दोनों चाहते थे की देश की जनता शोषण की बेरियों से मुक्त हो और इसी दिशा में उनके प्रयास रहे दोनों में एक चीज विरोधाभाषी थी लेकिन इसके बावजूद दोनों में कुछ समम्नताए भी थी भगत सिंह नास्तिक थे और गांधी जी परम आस्तिक लेकिन धर्म के नाम पर फैलाई जाने वाली नफरत के दोनों ही खिलाफ थे। देश्वसियों को पूरा विश्वास था की भगत सिंह को कोई बच्चा सकता है तो वो सिर्फ गांधी जी है इसलीय देश की जनता गांधी जी पर पूरा भरोसा करती है की वो कुछ भी करके तीनों वीरों को बचा लेंगे। गांधी जी ने यहा तक बोल दिया था की मैं भगत सिंह को बचाने के लिय अपना जीवन भी कुर्बान कर सकता हु। लेकिन महात्मा गांधी जी ने अपना पूर्ण जोर इसलीय नहीं लगाया क्योंकि वह खुल कर भगत सिंह के हिंसात्मक क्रांतिकारी योगदान का समर्थन नहीं करना चाहते थे क्योंकि उन्हे मालूम था की भगत सिंह खुद को बचना नहीं चाहते थे उनकी जिद्द थी की वो फासी पर चढ़ेंगे। शुभस चंद्र बौस ने तो बोल दिया ...
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