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Mahatma Gandhi Ji

Mahatma Gandhi Ji      नमस्कार, दोस्तों यहाँ हम अपने सम्माननीय राष्ट्रीय पिता महात्मा गांधी जी के बारे में बात कर रहे हैं। साथ ही हम  यह  भी जानेंगे की महात्मा गाँधी जी ने अपने जीवन काल में किस किस तरह की परिस्थितियों का सामना किया और किस तरह से स्वतंत्रता आंदोलन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया | भारतीय  राजनीति में महात्मा गाँधी जी एक महत्वपूर्ण स्थान रखते है | लेकिन उससे भी पहले पूरा देश उनको जिस सम्मान की द्रिष्टि से  देखता हैं | वैसा सम्मान ना तो किसी और व्यक्तित्व को मिला हैं और ना ही आने वाली कई शताब्दियों तक मिलने की सम्भावना है | राष्ट्रपिता के नाम से सुशोभित महात्मा गाँधी देश की अमूल्य धरोहर में से एक है क्योंकि उनका सम्मान और उनके  विचारों का अनुभव ना केवल भारतीय करते है बल्कि भारत के बाहर भी बहुत बड़ी संख्या में लोग गाँधी जी के विचारों और कार्यो को सम्मान की द्रिष्टि से देखते है | गाँधी जी का पूरा नाम :-  Mohandas Karamchand Gandhi   जन्म तिथि  -  2 October 1869 मृत्यु  तिथि  - ...

Some interesting facts about Bhagat Singh

भागत सिंह के बारे में कुछ गजब के रोचक तथ्य:-     भगत सिंह को हिन्दी, उर्दू, पंजाबी तथा अंग्रेजी के अलावा बांग्ला भी आती थी जो उनहोने बटूकेसवर दत से सीखी थी।   भगत सिंह को प्यार से घर में सब भगू कहकर बुलाते थे। 21 जून 1929 के दिन को भगत सिंह के नाम पर मनाया गया था, अंग्रेजों को यह दर्शाने के लिय की भारतीय जनता भगत सिंह के समर्थन में कुछ भी कर सकती है। फासी के समय भगत सिंह और सुखदेव की उम्र सिर्फ 23 साल थी लेकिन राजगुरु की उम्र 22 साल थी। भगत सिंह के कानूनी सलाहकार दूनी चंद थे तथा ब्रिटिश हुकूमत की तरफ से वकील कार्डन नोंड थे। भगत सिंह पहले आदमी थे जिन्होंने कोंग्रेस पार्टी के डोमिनीयन स्टेटस की जगह पूर्ण स्वराज की मांग की थी। भगत सिंह शादी नहीं करना चाहते थे, जब उनके माता - पिता उनकी शादी की योजना बना रहे थे तब वह घर छोर कर कानपुर आ गए थे और तब उन्होंने कहा था “अब तो आजादी ही मेंरी दुल्हन बनेगी” कॉलेज के दिनों में भगत सिंह एक अच्छे अभिनेता भी थे उन्होंने बहुत से नाटकों में  भी हिस लिया था और भगत सिंह को कुस्ती का भी शौक था । भगत सिंह एक अच्छे वक्ता और लेखक ...

Ideology of Bhagat Singh

जब भी हम लोग भगत सिंह का नाम सुनते है तो हमारे दिमाग मे सरप्राथम हथियार और हिंसा आता है। भगत सिंह को अपने जमाने का सबसे आधीक अग्रणी बुद्धिजीवियों में से एक माना जाता।  उनके मित्रों का कहना था की भगत सिंह जब भी दिखते थे उनके हाथ मे कोई न कोई पुस्तक जरूर रहती थी। उन्होंने विस्तार मे पढ़ा था  ब्रिटिश , यूरोपीय , अमेरिकी और रुसी साहित्य। 250  से भी अधिक किताबे उन्होंने पढ़ी थी गिरफ्तार होने से पहले , इसके बाद  अपने 2 साल के कारावास के दौरान उन्होंने 300 से भी अधिक कितबे पढ़ी थी। भगत सिंह को ना सिर्फ किताबे पढ़ने के लिय बल्कि उनके लेखों के लिय भी जाना जाता था। उनके  लेख  छपते थे : -  कीर्ति , अकाली और वीर अर्जुन प्रताप जैसी मैगजीन मे जो उस जमाने की मुख्य मैगजीन हुआ करती थी।       भगत सिंह ने कहा था : -                   “बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं आती।                    क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है।” ...