जब भी हम लोग भगत सिंह का नाम सुनते है तो हमारे दिमाग मे सरप्राथम हथियार और हिंसा आता है। भगत सिंह को अपने जमाने का सबसे आधीक अग्रणी बुद्धिजीवियों में से एक माना जाता। उनके मित्रों का कहना था की भगत सिंह जब भी दिखते थे उनके हाथ मे कोई न कोई पुस्तक जरूर रहती थी। उन्होंने विस्तार मे पढ़ा था ब्रिटिश , यूरोपीय , अमेरिकी और रुसी साहित्य।
250 से भी अधिक किताबे उन्होंने पढ़ी थी गिरफ्तार होने से पहले, इसके बाद अपने 2 साल के कारावास के दौरान उन्होंने 300 से भी अधिक कितबे पढ़ी थी।
भगत सिंह ने कहा था : -
“बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं आती।
क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है।”
3 बरे विचार
INTERNATIONALISM :- इसी विचारधारा को दर्शाते हुए एक प्रशीध श्लोक है महाउपनिषद और ऋग्वेद जिसमे लिखा हाई, वसुधैव कुटुंबकम (THE WORLD IS ONE FAMILY) अथार्त पूरी दुनिया एक परिवार है। INTERNATIONALISM एक ऐसी विचारधारा जिसमे भगत सिंह बहुत विश्वास करते थे। उस विश्वास को प्रकट करते हुए भगत सिंह ने के लेख लिखा था कलकत्ता की मैगजीन मतबाला मे इसमे भगत सिंह बताते है की
हर किसी को अपना हो जाने दो।
कोई भी अजनबी न हो।
वह कैसा सुंदर समय होगा , जब दुनिया से।
परायेपन का भाव हमेशा के लिय मीट जाएगा।
वह दिन जब यह हमेशा के लिय मीट जाएगा।
उस दिन जब यह आदर्श स्थापित होगा।
उस दिन यह कह सकेंगे , की दुनिया ने
भगत सिंह नेहरू जी की इस विचारधारा से सहमत थे की अगर हमे कोई चीज नहीं समझ मे आती है तो हमे उसे अंधभक्तों की तरह नहीं अपनाना चाहिए चाहे वो वेदास , कुरान , बाइबल और गुरुगोबिन्द साहेब मे भी क्यू ना लिखा गया हो।
अपने 1927 मे लिखे गए लेख RELIGIOUS RIOTS AND THEIR SOLUTION मे भगत सिंह बात करते है EGALITARIANISM की और लिखते है की : -
RELIGIOUS RIOTS AND THEIR SOLUTION
दुनिया के सभी गरीब लोग ,
चाहे जिस भी जाती , धर्म , नस्ल या देश के हो ,
सभी के वही अधिकार है।
ये तुम्हारे फायदे मे है की धर्म , रंग , नस्ल
और राष्ट्रीयता को लेकर भेद भाव बंद हो सके ,
और सरकार की पावर तुम्हारे हाथों मे हो।
लोगों को आपस मे लरने से रोकना है ,
तो उन्हे आमिर – गरीब का एहसास दिलाना होगा ।
गरीब मजदूरों और किसानों क यह समझना होगा ,
की उनके असली दुश्मन पूँजीवादी है ।
दूसरी तरफ जो THEORY OF PUNISHMENT है यानि किसी को PUNISH किया जाए उनके गलत कामों के लिय ये भी एक एसी सोच है जो अब दुनिया से हटाया जा रहा है धीरे – धीरे।
एक और REFORMATIVE विचारधारा है जो आज के दिन दुनिया मे धीरे – धीरे अपनाई जा रही है जो की आवश्यक चीज है मानवीय उद्धार के लिय, इस REFORMATIVE सिद्धांत के अनुसार किसी ने अगर गलत किया है तो उसे REFORM किया जाए एक शांति प्रिय व्यक्ति मे भगत सिंह पूछते है की भगवान किसी को अगर अगले जन्म मे किसी जानवर मे बदले देंगे तो वो कसे REFORM कर पाएगा या फी अगले जन्म मे उसे गरीब परिवार मे पैदा करे तो कैसे वो अपना OPPRESSION होने से रोक पाएगा गरीब परिवार मे पैदा होने की वजह से उसका दिल और कुरुर बंता जाएगा और आगे चल कर वो फिर से कोई गुनाह करता है तो क्या ये भगवान की गलती नहीं है।
SOCIALISAM : - SOCIALIST REVOLUTIONARY के तौर पर भगत सिंह कार्ल मार्क्स और लेनिन की SOCIALISAM विचारधारा से बहुत प्रभावित थे। उन्हे दर्द होता था जब वो देखते थे, कैसे किसानों , मजदूरों , फैक्ट्री मजदूरों के साथ व्यवहार किया जाता है समाज के द्वारा। वह इसी निचले वर्ग के लिय काम करना चाहते थे। भगत सिंह के इन विचारों को हम देखते है 1923 मे लिखे उनके एक लेख मे जहा पर वह गुरु गोबिन्द सिंह के विचरो को दर्शाते हुए कहते है
“ सुर सो पहचानिेए , जो लरे दिन के हित
पुर्जा – पुर्जा कट मरे , कभू ना छरे खेत ”
अथार्त बहादुर वो है जो दबे कुचले लोगों के लिय लरे है , भले ही वह मर जाए मगर मैदान छोर कर नहीं भगता।
हमारे ज़्यादातर नेताओ की पहली प्राथमिकता थी देश को ब्रिटिश हूकूमत से आजादी दिलाना और दबे कुचले लोगों को SOCIAL न्याय दिलाना दितिया प्राथमिकता थी।
लेकिन भगत सिंह का मनना था की एक किसन और एक मजदूर के लिय फर्क नहीं परता है की ऊपर सरकार मे कौन बैठा है चाहे वो अंग्रेज हो है या भारतीय हो शोषन तो शोषन ही होता है फर्क नहीं परत की शोषन करने वाला कौन है चाहे लॉर्ड रीडिंग हो या सर पुरुषोतमदास ठाकुरदास हो किसनों और मजदूरों की जिंदगी मे कोई बदलाव नहीं आएगा अगर इसी तरह से शोषन चलता रहेगा तो।
अपने फ़रवरी 1931 के लेख मे भगत सिंह कहते है “ POLITICA REVOLUTION IS THE INDESPENSABLE PRE – CONDITION , BUT THE ULTIMATE OBJECTIVE IS THE SOCIALIST REVOLUTION ”
इसी विचारधारा के चलते उन्होंने चंद्र शेखर आजाद की HRA नामक क्रांतिकारी दल मे शामिल होने के बाद इसके नाम मे SOCIALIST शब्द जोरकर HSRA कर दिया
भगत सिंह की विचारधारा इनके द्वारा बोले गए नारों मे भी दिखता है जब भगत सिंह और बटूकेश्वर दत ने असेंबली मे बम फैकने के और उसके बाद पकरे जाने पर कोर्ट सुनवाई के दौरान अपनी आवाज को बुलंद करते हुए नारे बोले थे।
“ INQUILAB JINDABD ”
“ WORKERS OF THE WORLD UNITE ”
“ DOWN WITH IMPERIALISM ”
“ LONG LIVE SOCIALIST REVOLUTION ”
THEY MAY KILL ME BUT THEY CANNOT KILL MY IDEAS,
THEY CAN CRUSH MY BODY BUT THEY WILL NOT
BE ABLE TO CRUSH MY SPIRIT
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